प्रस्तावना की पगधार

विश्व में चल रही परिवर्तन की हवा विज्ञानने भरी है प्रगतिमय दोड दिन प्रतिदिन संसार हो रहा है छोटा और घर घर में फैली है इंटरनेट की साल आँखखुली दृअष्टि मंडाई क्षितिज पर तो आँखओ के सामने नोबत बजती हुई सुनाई दी हृदय खुश खुशाल हो उठा | छाती गजगज फूल गई उमर पडा साहेलाब बनकर हमारा प्यारा सा नारलाई गाँव ...
आज के यंत्र जैसे चालवाले मुंबई शहर में आदमीयों को कामों में से फूरसद नहीं पाते ऐसे समय में आप सभी सम्मानीय के ऐड्रेस ढूंढना तो नारलाई जैन युवक मंडळ ने हम सब आत्मीयता से एक दूसरे को मील सके नजदीक आ सके इसलिए एक आदर्श प्रयास किया है | टेलिफोन डायरी बनाना ऐड्रेस लेना और परिवार के सभी सदस्यों का संपूर्ण ब्योरा उस पत्रिका में छापना |
नारलाई गाँव की यह संपर्क सेतू सिर्फ जनसंख्या या वस्लपत्रक नहीं है | यह हमार अस्तित्व की परिचय देती हुई अस्मिता दाखाल हुई हमारा हुबहू चित्र है...
न जमी तक, न गगन तक न उन्नती के पथ तक . हम सबको जाना है एक दूजे के मन तक....
गाँव की लागनी और उसकी उमिओंको जिवीत रखने का हर एक को रेशम के बंधन में गूंथने का यह हमारा विनम्र प्रयास है अतित की भावनाओं से आपकी उदारता समर्पण भावना हमेशा हमारे साथ रहे है | भविष्य में आप सभीका साथ सत्कार मिलता ही रहेगा ऐसा खातरी के साथ आभार |

श्री नारलाई नवयुवक जैन मंडल के सभी कार्यकर्ता गण और पदाधिकारी सभ्यों का प्रणाम

Shri Narlai Jain Navyuvak Mandal's website www.narlaijain.com is successfully launched by Smt Shantaben Ganeshmalji Sanghvi Parivar on 19-12-2010.